Surajgarh Nishan History and Story


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Surajgarh Nishan History


मंदिर के शिखर पर झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ का निशान साल भर लहराता रहता है. मंदिर पर सूरजगढ़ का निशान लहराने के पीछे एक किवदंती है.

Surajgarh Nishan Story


इसके अनुसार काफी वर्ष पहले श्याम भक्तों में मंदिर पर अपना निशान चढाने की होड़ मच गई थी तब इस बात पर सहमति बनी कि जो श्याम भक्त मंदिर के बंद ताले को मोरछड़ी से खोलेगा, उसी का निशान शिखर पर चढ़ेगा.

Surajgarh Nishan relation with Morchhadi


सूरजगढ़ से निशान लेकर आए श्याम भक्त मंगलाराम ने मंदिर के ताले को मोरछड़ी से खोल दिया. उस समय से ही मंदिर के शिखर पर सूरजगढ़ का निशान चढ़ता आ रहा है. वर्तमान में मंगलाराम के परिवार व सूरजगढ़ के लोग इस परम्परा को निभा रहे हैं.


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ramesh sharma

Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

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